Text of Prime Minister’s Mann ki Baat on All India Radio on 28.02.2016

By | February 28, 2016

Text of Prime Minister’s  Mann ki Baat on All India Radio

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार! आप रेडियो पर मेरी ‘मन की बात’ सुनते होंगे, लेकिन दिमाग इस बात पर लगा होगा – बच्चों के exam शुरू हो रहे हैं, कुछ लोगों के दसवीं-बारहवीं के exam शायद 1 मार्च को ही शुरू हो रहे हैं। तो आपके दिमाग में भी वही चलता होगा। मैं भी आपकी इस यात्रा में आपके साथ शरीक होना चाहता हूँ। आपको आपके बच्चों के exam की जितनी चिंता है, मुझे भी उतनी ही चिंता है। लेकिन अगर हम exam को, परीक्षा को देखने का अपना तौर-तरीका बदल दें, तो शायद हम चिंतामुक्त भी हो सकते हैं।

मैंने पिछली मेरी ‘मन की बात’ में कहा था कि आप NarendraModiApp पर अपने अनुभव, अपने सुझाव मुझे अवश्य भेजिए। मुझे खुशी इस बात की है – शिक्षकों ने, बहुत ही सफल जिनकी करियर रही है ऐसे विद्यार्थियों ने, माँ-बाप ने, समाज के कुछ चिंतकों ने बहुत सारी बातें मुझे लिख कर के भेजी हैं। दो बातें तो मुझे छू गईं कि सब लिखने वालों ने विषय को बराबर पकड़ के रखा। दूसरी बात इतनी हजारों मात्रा में चीज़ें आई कि मैं मानता हूँ कि शायद ये बहुत महत्वपूर्ण विषय है। लेकिन ज़्यादातर हमने exam के विषय को स्कूल के परिसर तक या परिवार तक या विद्यार्थी तक सीमित कर दिया है। मेरी App पर जो सुझाव आये, उससे तो लगता है कि ये तो बहुत ही बड़ा, पूरे राष्ट्र में लगातार विद्यार्थियों के इन विषयों की चर्चायें होती रहनी चाहिए।

मैं आज मेरी इस ‘मन की बात’ में विशेष रूप से माँ-बाप के साथ, परीक्षार्थियों के साथ और उनके शिक्षकों के साथ बातें करना चाहता हूँ। जो मैंने सुना है, जो मैंने पढ़ा है, जो मुझे बताया गया है, उसमें से भी कुछ बातें बताऊंगा। कुछ मुझे जो लगता है, वो भी जोड़ूंगा। लेकिन मुझे विश्वास है कि जिन विद्यार्थियों को exam देनी है, उनके लिए मेरे ये 25-30 मिनट बहुत उपयोगी होंगे, ऐसा मेरा मत है।

मेरे प्यारे विद्यार्थी मित्रो, मैं कुछ कहूँ, उसके पहले आज की ‘मन की बात’ का opening, हम विश्व के well-known opener के साथ क्यूँ न करें। जीवन में सफलता की ऊँचाइयों को पाने में कौन-सी चीज़ें उनको काम आईं, उनके अनुभव आपको ज़रूर काम आएँगे। भारत के युवाओं को जिनके प्रति नाज़ है, ऐसे भारतरत्न श्रीमान सचिन तेंदुलकर, उन्होंने जो message भेजा है, वह मैं आपको सुनाना चाहता हूँ: –

“नमस्कार, मैं सचिन तेंदुलकर बोल रहा हूँ। मुझे पता है कि exams कुछ ही दिनों में start होने वाली हैं। आप में से कई लोग tense भी रहेंगे। मेरा एक ही message है आपको कि आपसे expectations आपके माता-पिता करेंगे, आपके teachers करेंगे, आपके बाकी के family members करेंगे, दोस्त करेंगे। जहाँ भी जाओगे, सब पूछेंगे कि आपकी तैयारी कैसी चल रही है, कितने percent आपका स्कोर करोगे। यही कहना चाहूँगा मैं कि आप ख़ुद अपने लिए कुछ target set कीजियेगा, किसी और के expectation के pressure में मत आइयेगा। आप मेहनत ज़रूर कीजियेगा, मगर एक realistic achievable target खुद के लिए सेट कीजिये और वो target achieve करने के लिए कोशिश करना। मैं जब Cricket खेलता था, तो मेरे से भी बहुत सारे expectations होते थे। पिछले 24 साल में कई सारे कठिन moments आये और कई-कई बार अच्छे moments आये, मगर लोगों के expectations हमेशा रहते थे और वो बढ़ते ही गये, जैसे समय बीतता गया, expectations भी बढ़ते ही गए। तो इसके लिए मुझे एक solution find करना बहुत ज़रूरी था। तो मैंने यही सोचा कि मैं मेरे खुद के expectations रखूँगा और खुद के targets set करूँगा। अगर वो मेरे खुद के targets मैं set कर रहा हूँ और वो achieve कर पा रहा हूँ, तो मैं ज़रूर कुछ-न-कुछ अच्छी चीज़ देश के लिए कर पा रहा हूँ। और वो ही targets मैं हमेशा achieve करने की कोशिश करता था। मेरा focus रहता था ball पे और targets अपने आप slowly-slowly achieve होते गए। मैं आपको यही कहूँगा कि आप, आपकी सोच positive होनी बहुत ज़रूरी है। positive सोच को positive results follow करेंगे। तो आप positive ज़रूर रहियेगा और ऊपर वाला आपको ज़रूर अच्छे results दे, ये मुझे, इसकी पूरी उम्मीद है और आपको मैं best wishes देना चाहूँगा exams के लिए। एक tens।on free जा के पेपर लिखिये और अच्छे results पाइये। Good Luck!”

दोस्तो, देखा, तेंदुलकर जी क्या कह रहे हैं। ये expectation के बोझ के नीचे मत दबिये। आप ही को तो आपका भविष्य बनाना है। आप खुद से अपने लक्ष्य को तय करें, खुद ही अपने target तय करें – मुक्त मन से, मुक्त सोच से, मुक्त सामर्थ्य से। मुझे विश्वास है कि सचिन जी की ये बात आपको काम आएगी। और ये बात सही है | प्रतिस्पर्द्धा क्यों? अनुस्पर्द्धा क्यों नहीं। हम दूसरों से स्पर्द्धा करने में अपना समय क्यों बर्बाद करें। हम खुद से ही स्पर्द्धा क्यों न करें। हम अपने ही पहले के सारे रिकॉर्ड तोड़ने का तय क्यों न करें। आप देखिये, आपको आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं पायेगा और अपने ही पिछले रिकॉर्ड को जब तोड़ोगे, तब आपको खुशी के लिए, संतोष के लिए किसी और से अपेक्षा भी नहीं रहेगी। एक भीतर से संतोष प्रकट होगा।

दोस्तो, परीक्षा को अंकों का खेल मत मानिये। कहाँ पहुँचे, कितना पहुँचे? उस हिसाब-किताब में मत फँसे रहिये। जीवन को तो किसी महान उद्देश्य के साथ जोड़ना चाहिए। एक सपनों को ले कर के चलना चाहिए, संकल्पबद्ध होना चाहिए। ये परीक्षाएँ, वो तो हम सही जा रहे हैं कि नहीं जा रहे, उसका हिसाब-किताब करती हैं; हमारी गति ठीक है कि नहीं है, उसका हिसाब-किताब करती हैं। और इसलिए विशाल, विराट ये अगर सपने रहें, तो परीक्षा अपने आप में एक आनंदोत्सव बन जायेगी। हर परीक्षा उस महान उद्देश्य की पूर्ति का एक कदम होगी। हर सफलता उस महान उद्देश्य को प्राप्त करने की चाभी बन जायेगी। और इसलिए इस वर्ष क्या होगा, इस exam में क्या होगा, वहाँ तक सीमित मत रहिये। एक बहुत बड़े उद्देश्य को ले कर के चलिये और उसमें कभी अपेक्षा से कुछ कम भी रह जाएगा, तो निराशा नहीं आएगी। और ज़ोर लगाने की, और ताक़त लगाने की, और कोशिश करने की हिम्मत आएगी।

जिन हज़ारों लोगों ने मुझे मेरे App पर मोबाइल फ़ोन से छोटी-छोटी बातें लिखी हैं। श्रेय गुप्ता ने इस बात पर बल दिया है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है। students अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपनी health का भी ध्यान रखें, जिससे आप exam में स्वस्थतापूर्वक अच्छे से लिख सकें। अब मैं आज आखिरी दिन ये तो नहीं कहूँगा कि आप दंड-बैठक लगाना शुरू कर दीजिये और तीन किलोमीटर, पाँच किलोमीटर दौड़ने के लिए जाइये। लेकिन एक बात सही है कि खास कर के exam के दिनों मे आप का routine कैसा है। वैसे भी 365 दिवस हमारा routine हमारे सपनों और संकल्पों के अनुकूल होना चाहिये। श्रीमान प्रभाकर रेड्डी जी की एक बात से मैं सहमत हूँ। उन्होंने ख़ास आग्रह किया हैं, समय पर सोना चाहिए और सुबह जल्दी उठकर revision करना चाहिए। examination centre पर प्रवेश-पत्र और दूसरी चीजों के साथ समय से पहले पहुँच जाना चाहिए। ये बात प्रभाकर रेड्डी जी ने कही है, मैं शायद कहने की हिम्मत नहीं करता, क्योंकि मैं सोने के संबंध में थोड़ा उदासीन हूँ और मेरे काफ़ी दोस्त भी मुझे शिकायत करते रहते हैं कि आप बहुत कम सोते हैं। ये मेरी एक कमी है, मैं भी ठीक करने की कोशिश करूँगा। लेकिन मैं इससे सहमत ज़रूर हूँ। निर्धारित सोने का समय, गहरी नींद – ये उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि आपकी दिन भर की और गतिविधियाँ और ये संभव है। मैं भाग्यवान हूँ, मेरी नींद कम है, लेकिन बहुत गहरी ज़रूर है और इसके लिए मेरा काम चल भी जाता है। लेकिन आपसे तो मैं आग्रह करूँगा। वरना कुछ लोगों की आदत होती है, सोने से पहले लम्बी-लम्बी टेलीफ़ोन पर बात करते रहते हैं। अब उसके बाद वही विचार चलते रहते हैं, तो कहाँ से नींद आएगी? और जब मैं सोने की बात करता हूँ, तो ये मत सोचिए कि मैं exam के लिए सोने के लिए कहा रहा हूँ। गलतफ़हमी मत करना। मैं exam के time पर तो आपको अच्छी परीक्षा देने के लिए तनावमुक्त अवस्था के लिए सोने की बात कर रहा हूँ। सोते रहने की बात नहीं कर रहा हूँ। वरना कहीं ऐसा न हो कि marks कम आ जाये और माँ पूछे कि क्यों बेटे, कम आये, तो कह दो कि मोदी जी ने सोने को कहा था, तो मैं तो सो गया था। ऐसा नहीं करोगे न! मुझे विश्वास है नहीं करोगे।

वैसे जीवन में, discipline सफलताओं की आधारशिला को मजबूत बनाने का बहुत बड़ा कारण होती है। एक मजबूत foundation discipline से आता है। और जो unorganized होते हैं, Indiscipline होते हैं, सुबह करने वाला काम शाम को करते हैं, दोपहर को करने वाला काम रात देर से करते हैं, उनको ये तो लगता है कि काम हो गया, लेकिन इतनी energy waste होती है और हर पल तनाव रहता है। हमारे शरीर में भी एक-आध अंग, हमारे body का एक-आध part थोड़ी-सी तकलीफ़ करे, तो आपने देखा होगा कि पूरा शरीर सहजता नहीं अनुभव करता है। इतना ही नहीं, हमारा routine भी चरमरा जाता है। और इसलिए किसी चीज़ को हम छोटी न मानें। आप देखिये, अपने-आपको कभी जो निर्धारित है, उसमें compromise करने की आदत में मत फंसाइए। तय करें, करके देखें।

दोस्तो, कभी-कभी मैंने देखा है कि जो student exam के लिए जाते हैं, दो प्रकार के student होते हैं, एक, उसने क्या पढ़ा है, क्या सीखा है, किन बातों में उसकी अच्छी ताक़त है – उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। दूसरे प्रकार के student होते हैं – यार, पता नहीं कौन-सा सवाल आयेगा, पता नहीं कैसा सवाल आयेगा, पता नहीं कर पाऊंगा कि नहीं कर पाऊंगा, पेपर भारी होगा कि हल्का होगा? ये दो प्रकार के लोग देखे होंगे आपने। जो कैसा पेपर आयेगा, उसके tension में रहता है, उसका उसके परिणाम पर भी नकारात्मक प्रभाव होता है। जो मेरे पास क्या है, उसी विश्वास से जाता है, तो कुछ भी आ जाये, वो निपट लेता है। इस बात को मुझसे भी अच्छी तरह अगर कोई कह सकता है, तो checkmate करने में जिनकी मास्टरी है और दुनिया के अच्छों-अच्छों को जिसने checkmate कर दिया है, ऐसे Chess के champ।on विश्वनाथन आनंद, वो अपने अनुभव बतायेंगे। आइये, इस exam में आप checkmate करने का तरीका उन्हीं से सीख लीजिए: –

“Hello, this is Viswanathan Anand. First of all, let me start off by wishing you all the best for your exams. I will next talk a little bit about how I went to my exams and my experiences for that. I found that exams are very much like problems you face later in life. You need to be well rested, get a good night’s sleep, you need to be on a full stomach, you should definitely not be hungry and the most important thing is to stay calm. It is very very similar to a game of Chess. When you play, you don’t know, which pawn will appear, just like in a class you don’t know, which question will appear in an exam. So if you stay calm and you are well nourished and have slept well, then you will find that your brain recalls the right answer at the right moment. So stay calm. It is very important not to put too much pressure on yourself, don’t keep your expectations too high. Just see it as a challenge – do I remember what I was taught during the year, can I solve these problems. At the last minute, just go over the most important things and the things you feel, the topics you feel, you don’t remember very well. You may also recall some incidents with the teacher or the students, while you are writing an exam and this will help you recall a lot of subject matter. If you revise the questions you find difficult, you will find that they are fresh in your head and when you are writing the exam, you will be able to deal with them much better. So stay calm, get a good night’s sleep, don’t be over-confident but don’t be pessimistic either. I have always found that these exams go much better than you fear before. So stay confident and all the very best to you.”

विश्वनाथन आनंद ने सचमुच में बहुत ही महत्वपूर्ण बात बताई है और आपने भी जब उनको अन्तर्राष्ट्रीय Chess के गेम में देखा होगा, कितनी स्वस्थता से वो बैठे होते हैं और कितने ध्यानस्थ होते हैं। आपने देखा होगा, उनकी आँखें भी इधर-उधर नहीं जाती हैं। कभी हम सुनते थे न, अर्जुन के जीवन की घटना कि पक्षी की आँख पर कैसे उनकी नज़र रहती थी। बिलकुल वैसे ही विश्वनाथन को जब खेलते हुए देखते हैं, तो बिलकुल उनकी आँखें एकदम से बड़ी target पर fix रहती हैं और वो भीतर की शांति की अभिव्यक्ति होती है। ये बात सही है कि कोई कह दे, इसलिये फिर भीतर की शांति आ ही जायेगी, ये तो कहना कठिन है। लेकिन कोशिश करनी चाहिये! हँसते-हँसते क्यों न करें! आप देखिये, आप हँसते रहेंगे, खिलखिलाहट हँसते रहेंगे exam के दिन भी, अपने-आप शांति आना शुरू हो जाएगी। आप दोस्तों से बात नहीं कर रहे हैं या अकेले चल रहे हैं, मुरझाए-मुरझाए चल रहे हैं, ढेर सारी किताबों को last moment भी हिला रहे हैं, तो-तो फिर वो शांत मन हो नहीं सकता है। हँसिए, बहुत हँसते चलिए, साथियों के साथ चुटकले share करते चलिए, आप देखिए, अपने-आप शांति का माहौल खड़ा हो जाएगा।

मैं आपको एक बात छोटी सी समझाना चाहता हूँ। आप कल्पना कीजिये कि एक तालाब के किनारे पर आप खड़े हैं और नीचे बहुत बढ़िया चीज़ें दिखती हैं। लेकिन अचानक कोई पत्थर मार दे पानी में और पानी हिलना शुरू हो जाए, तो नीचे जो बढ़िया दिखता था, वो दिखता है क्या? अगर पानी शांत है, तो चीज़ें कितनी ही गहरी क्यों न हों, दिखाई देती हैं। लेकिन पानी अगर अशांत है, तो नीचे कुछ नहीं दिखता है। आपके भीतर बहुत-कुछ पड़ा हुआ है। साल भर की मेहनत का भण्डार भरा पड़ा है। लेकिन अशांत मन होगा, तो वो खज़ाना आप ही नहीं खोज पाओगे। अगर शांत मन रहा, तो वो आपका खज़ाना बिलकुल उभर करके आपके सामने आएगा और आपकी exam एकदम सरल हो जायेगी।

मैं एक बात बताऊं मेरी अपनी – मैं कभी-कभी कोई लेक्चर सुनने जाता हूँ या मुझे सरकार में भी कुछ विषय ऐसे होते हैं, जो मैं नहीं जानता हूँ और मुझे काफी concentrate करना पड़ता है। तो कभी-कभी ज्यादा concentrate करके समझने की कोशिश करता हूँ, तो एक भीतर तनाव महसूस करता हूँ। फिर मुझे लगता है, नहीं-नहीं, थोड़ा relax कर जाऊँगा, तो मुझे अच्छा रहेगा। तो मैंने अपने-आप अपनी technique develop की है। बहुत deep breathing कर लेता हूँ। गहरी साँस लेता हूँ। तीन बार-पांच बार गहरी साँस लेता हूँ, समय तो 30 सेकिंड, 40 सेकिंड, 50 सेकिंड जाता है, लेकिन फिर मेरा मन एकदम से शांत हो करके चीज़ों को समझने के लिए तैयार हो जाता है। हो सकता है, ये मेरा अनुभव हो, आपको भी काम आ सकता है।

रजत अग्रवाल ने एक अच्छी बात बतायी है। वो मेरी App पर लिखते हैं – हम हर दिन कम-से-कम आधा घंटे दोस्तों के साथ, परिवारजनों के साथ relax feel करें। गप्पें मारें। ये बड़ी महत्वपूर्ण बात रजत जी ने बताई है, क्योंकि ज्यादातर हम देखते हैं कि हम जब exam दे करके आते हैं, तो गिनने के लिए बैठ जाते हैं, कितने सही किया, कितना गलत किया। अगर घर में माँ-बाप भी पढ़े लिखे हों और उसमें भी अगर माँ-बाप भी टीचर हों, तो-तो फिर पूरा पेपर फिर से लिखवाते हैं – बताओ, तुमने क्या लिखा, क्या हुआ! सारा जोड़ लगाते हैं, देखो, तुम्हें 40 आएगा कि 80 आएगा, 90 आएगा! आपका दिमाग जो exam हो गयी, उसमें खपा रहता है। आप भी क्या करते हैं, दोस्तों से फ़ोन पर share करते हैं, अरे यार, उसमें तुमने क्या लिखा! अरे यार, उसमें तुम्हारा कैसा गया! अच्छा, तुम्हें क्या लगा। यार, मेरी तो गड़बड़ हो गयी। यार, मैंने तो गलती कर दी। अरे यार, मुझे ये तो मालूम था, लेकिन मुझे याद नहीं आया। हम उसी में फँस जाते हैं। दोस्तो, ये मत कीजिये। exam के समय हो गया, सो हो गया। परिवार के साथ और विषयों पर गप्पें मारिए। पुरानी हँसी-खुशी की यादें ताज़ा कीजिए। कभी माँ-बाप के साथ कहीं गये हों, तो वहाँ के दृश्यों को याद करिए। बिलकुल उनसे निकल करके ही आधा घंटा बिताइए। रजत जी की बात सचमुच में समझने जैसी है।

दोस्तो, मैं क्या आपको शांति की बात बताऊँ। आज आपको exam देने से पहले एक ऐसे व्यक्ति ने आपके लिए सन्देश भेजा है, वे मूलतः शिक्षक हैं और आज एक प्रकार से संस्कार शिक्षक बने हुए हैं। रामचरितमानस, वर्तमान सन्दर्भ में उसकी व्याख्या करते-करते वो देश और दुनिया में इस संस्कार सरिता को पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे पूज्य मुरारी बापू ने भी विद्यार्थियों के लिए बड़ी महत्वपूर्ण tip भेजी है और वे तो शिक्षक भी हैं, चिन्तक भी हैं और इसलिए उनकी बातों में दोनों का मेल है: –

“मैं मुरारी बापू बोल रहा हूँ। मैं विद्यार्थी भाइयों-बहनों को यही कहना चाहता हूँ कि परीक्षा के समय में मन पर कोई भी बोझ रखे बिना और बुद्धि का एक स्पष्ट निर्णय करके और चित को एकाग्र करके आप परीक्षा में बैठिये और जो स्थिति आई है, उसको स्वीकार कर लीजिए। मेरा अनुभव है कि परिस्थिति को स्वीकार करने से बहुत हम प्रसन्न रह सकते हैं और खुश रह सकते हैं। आपकी परीक्षा में आप निर्भार और प्रसन्नचित्त आगे बढ़ें, तो ज़रूर सफलता मिलेगी और यदि सफलता न भी मिली, तो भी fail होने की ग्लानि नहीं होगी और सफल होने का गर्व भी होगा। एक शेर कह कर मैं मेरा सन्देश और शुभकामना देता हूँ – लाज़िम नहीं कि हर कोई हो कामयाब ही, जीना भी सीखिए नाकामियों के साथ। हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री का ये जो ‘मन की बात’ का कार्यक्रम है, उसको मैं बहुत आवकार देता हूँ। सबके लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामना। धन्यवाद।”

पूज्य मुरारी बापू का मैं भी आभारी हूँ कि उन्होंने बहुत अच्छा सन्देश हम सबको दिया। दोस्तो, आज एक और बात बताना चाहता हूँ। मैं देख रहा हूँ कि इस बार जो मुझे लोगों ने जो अपने अनुभव बताये हैं, उसमें योग की चर्चा अवश्य की है। और ये मेरे लिए खुशी की बात है कि इन दिनों मैं दुनिया में जिस किसी से मिलता हूँ, थोड़ा-सा भी समय क्यों न मिले, योग की थोड़ी सी बात तो कोई न कोई करता ही करता है। दुनिया के किसी भी देश का व्यक्ति क्यों न हो, भारत का कोई व्यक्ति क्यों न हो, तो मुझे अच्छा लगता है कि योग के संबंध में इतना आकर्षण पैदा हुआ है, इतनी जिज्ञासा पैदा हुई है और देखिये, कितने लोगों ने मुझे मेरे मोबाइल App पर, श्री अतनु मंडल, श्री कुणाल गुप्ता, श्री सुशांत कुमार, श्री के. जी. आनंद, श्री अभिजीत कुलकर्णी, न जाने अनगिनत लोगों ने meditation की बात की है, योग पर बल दिया है। खैर दोस्तो, मैं बिलकुल ही आज ही कह दूँ, कल सुबह से योग करना शुरू करो, वो तो आपके साथ अन्याय होगा। लेकिन जो योग करते हैं, वो कम से कम exam है इसलिए आज न करें, ऐसा न करें। करते हैं तो करिये। लेकिन ये बात सही है कि विद्यार्थी जीवन में हो या जीवन का उत्तरार्द्ध हो, अंतर्मन की विकास यात्रा में योग एक बहुत बड़ी चाभी है। सरल से सरल चाभी है। आप ज़रूर उस पर ध्यान दीजिए। हाँ, अगर आप अपने नजदीक में कोई योग के जानकार होंगे, उनको पूछोगे तो exam के दिनों में पहले योग नहीं किया होगा, तो भी दो-चार चीज़ें तो ऐसे बता देंगे, जो आप दो-चार-पाँच मिनट में कर सकते हैं। देखिये, अगर आप कर सकते हैं तो! हाँ, मेरा उसमें विश्वास बहुत है।

मेरे नौजवान साथियो, आपको परीक्षा हॉल में जाने की बड़ी जल्दी होती है। जल्दी-जल्दी पर अपने bench पर बैठ जाने का मन करता है? क्या ये चीज़ें हड़बड़ी में क्यों करें? अपना पूरे दिन का समय का ऐसा प्रबंधन क्यों न करें कि कहीं ट्रैफिक में रुक जाएँ, तो भी समय पर हम पहुँच ही जाएँ। वर्ना ऐसी चीज़ें एक नया तनाव पैदा करती हैं। और एक बात है, हमें जितना समय मिला है, उसमें जो प्रश्नपत्र है, जो instructions हैं, हमें कभी-कभी लगता है कि ये हमारा समय खा जाएगा। ऐसा नहीं है दोस्तो। आप उन instructions को बारीकी से पढ़िए। दो मिनट-तीन मिनट-पाँच मिनट जाएगी, कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन उससे exam में क्या करना है, उसमें कोई गड़बड़ नहीं होगी और बाद में पछतावा नहीं होगा और मैंने देखा है कि कभी-कभार पेपर आने के बाद भी pattern नयी आयी है, ऐसा पता चलता है, लेकिन पढ़ लेते हैं instructions, तो शायद हम अपने आपको बराबर cope-up कर लेते हैं कि हाँ, ठीक है, चलो, मुझे ऐसे ही जाना है। और मैं आपसे आग्रह करूँगा कि भले आपके पाँच मिनट इसमें जाएँ, लेकिन इसको ज़रूर करें।

श्रीमान यश नागर, उन्होंने हमारे मोबाइल App पर लिखा है कि जब उन्होनें पहली बार पेपर पढ़ा, तो उन्हें ये काफी कठिन लगा। लेकिन उसी पेपर को दोबारा आत्मविश्वास के साथ, अब यही पेपर मेरे पास है, कोई नये प्रश्न आने वाले नहीं हैं, मुझे इतने ही प्रश्नों से निपटना है और जब दोबारा मैं सोचने लगा, तो उन्होंने लिखा है कि मैं इतनी आसानी से इस पेपर को समझ गया, पहली बार पढ़ा तो लगा कि ये तो मुझे नहीं आता है, लेकिन वही चीज़ दोबारा पढ़ा, तो मुझे ध्यान में आया कि नहीं-नहीं सवाल दूसरे तरीक़े से रखा गया है, लेकिन ये तो वही बात है, जो मैं जानता हूँ। प्रश्नों को समझना ये बहुत आवश्यक होता है। प्रश्नों को न समझने से कभी-कभी प्रश्न कठिन लगता है। मैं यश नागर की इस बात पर बल देता हूँ कि आप प्रश्नों को दो बार पढ़ें, तीन बार पढ़ें, चार बार पढ़ें और आप जो जानते हैं, उसके साथ उसको match करने का प्रयास करें। आप देखिये, वो प्रश्न लिखने से पहले ही सरल हो जाएगा।

मेरे लिए आज खुशी की बात है कि भारतरत्न और हमारे बहुत ही सम्मानित वैज्ञानिक सी.एन.आर. राव, उन्होंने धैर्य पर बल दिया है। बहुत ही कम शब्दों में लेकिन बहुत ही अच्छा सन्देश हम सभी विद्यार्थियों को उन्होंने दिया है। आइये, राव साहब का message सुनें:-

“This is C.N.R. Rao from Bangalore. I fully realise that the examinations cause anxiety. That too competitive examinations. Do not worry, do your best. That’s what I tell all my young friends. At the same time remember, that there are many opportunities in this country. Decide what you want to do in life and don’t give it up. You will succeed. Do not forget that you are a child of the universe. You have a right to be here like the trees and the mountains. All you need is doggedness, dedication and tenacity. With these qualities you will succeed in all examinations and all other endeavours. I wish you luck in everything you want to do. God Bless.”

देखा, एक वैज्ञानिक का बात करने का तरीका कैसा होता है। जो बात कहने में मैं आधा घंटा लगाता हूँ, वो बात वो तीन मिनट में कह देते हैं। यही तो विज्ञान की ताकत है और यही तो वैज्ञानिक मन की ताकत है। मैं राव साहब का बहुत आभारी हूँ कि उन्होंने देश के बच्चों को प्रेरित किया। उन्होंने जो बात कही है – दृढ़ता की, निष्ठा की, तप की, यही बात है – dedication, determination, diligence. डटे रहो, दोस्तो, डटे रहो। अगर आप डटे रहोगे, तो डर भी डरता रहेगा। और अच्छा करने के लिए सुनहरा भविष्य आपका इन्तजार कर रहा है।

अब मेरे App पर एक सन्देश रुचिका डाबस ने अपने exam experience को share किया है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में exam के समय एक positive atmosphere बनाने का लगातार प्रयास होता है और ये चर्चा उनके साथी परिवारों में भी होती थी। सब मिला करके positive वातावरण। ये बात सही है, जैसा सचिन जी ने भी कहा, positive approach, positive frame of mind positive energy को उजागर करता है।

कभी-कभी बहुत सी बातें ऐसी होती हैं कि जो हमें प्रेरणा देती हैं, और ये मत सोचिए कि ये सब विद्यार्थियों को ही प्रेरणा देती हैं। जीवन के किसी भी पड़ाव पर आप क्यों न हों, उत्तम उदाहरण, सत्य घटनाएँ बहुत बड़ी प्रेरणा भी देती हैं, बहुत बड़ी ताकत भी देती हैं और संकट के समय नया रास्ता भी बना देती हैं। हम सब electricity bulb के आविष्कारक थॉमस एलवा एडिसन, हमारे syllabus में उसके विषय में पढ़ते हैं। लेकिन दोस्तो, कभी ये सोचा है, कितने सालों तक उन्होंने इस काम को करने के लिए खपा दिए। कितनी बार विफलताएँ मिली, कितना समय गया, कितने पैसे गए। विफलता मिलने पर कितनी निराशा आयी होगी। लेकिन आज उस electricity, वो bulb हम लोगों की ज़िंदगी को भी तो रोशन करता है। इसी को तो कहते हैं, विफलता में भी सफलता की संभावनायें निहित होती हैं।

श्रीनिवास रामानुजन को कौन नहीं जानता है। आधुनिक काल के महानतम गणित विचारकों में से एक नाम –Indian Mathematician. आपको पता होगा, उनका formal कोई education mathematics में नहीं हुआ था, कोई विशेष प्रशिक्षण भी नहीं हुआ था, लेकिन उन्होंने Mathematical analysis, number theory जैसे विभिन्न क्षेत्रों में गहन योगदान किया। अत्यंत कष्ट भरा जीवन, दुःख भरा जीवन, उसके बावज़ूद भी वो दुनिया को बहुत-कुछ दे करके गए।

जे. के. रॉलिंग एक बेहतरीन उदाहरण हैं कि सफलता कभी भी किसी को भी मिल सकती है। हैरी पॉटर series आज दुनिया भर में लोकप्रिय है। लेकिन शुरू से ऐसा नहीं था। कितनी समस्या उनको झेलनी पड़ी थी। कितनी विफलताएँ आई थीं। रॉलिंग ने खुद कहा था कि मुश्किलों में वो सारी ऊर्जा उस काम में लगाती थीं, जो वाकई उनके लिए मायने रखता था।

Exam आजकल सिर्फ़ विद्यार्थी की नहीं, पूरे परिवार की और पूरे स्कूल की, teacher की सबकी हो जाती है। लेकिन parents और teachers के support system के बिना अकेला विद्यार्थी, स्थिति अच्छी नहीं है। teacher हो, parents हों, even senior students हों, ये सब मिला करके हम एक टीम बनके, unit बनके समान सोच के साथ, योजनाबद्ध तरीक़े से आगे बढ़ें, तो परीक्षा सरल हो जाती है।

श्रीमान केशव वैष्णव ने मुझे App पर लिखा है, उन्होंने शिकायत की है कि parents ने अपने बच्चों पर अधिक marks मांगने के लिए कभी भी दबाव नहीं बनाना चाहिये। सिर्फ़ तैयारी करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिये। वो relax रहे, इसकी चिंता करनी चाहिये।

विजय जिंदल लिखते हैं, बच्चों पर उनसे अपनी उम्मीदों का बोझ न डालें। जितना हो सके, उनका हौसला बढ़ायें। विश्वास बनाये रखने में सहायता करें। ये बात सही है। मैं आज parents को अधिक कहना नहीं चाहता हूँ। कृपा करके दबाव मत बनाइये। अगर वो अपने किसी दोस्त से बात कर रहा है, तो रोकिये मत। एक हल्का-फुल्का वातावरण बनाइए, सकारात्मक वातावरण बनाइए। देखिये, आपका बेटा हो या बेटी कितना confidence आ जायेगा। आपको भी वो confidence नज़र आयेगा।

दोस्तो, एक बात निश्चित है, ख़ास करके मैं युवा मित्रों से कहना चाहता हूँ | हम लोगों का जीवन, हमारी पुरानी पीढ़ियों से बहुत बदल चुका है। हर पल नया innovation, नई टेक्नोलॉजी, विज्ञान के नित नए रंग-रूप देखने को मिल रहे हैं और हम सिर्फ अभिभूत हो रहे हैं, ऐसा नहीं है। हम उससे जुड़ने का पसंद करते हैं। हम भी विज्ञान की रफ़्तार से आगे बढ़ना चाहते हैं।

मैं ये बात इसलिए कर रहा हूँ, दोस्तो कि आज National Science Day है। National Science Day, देश का विज्ञान महोत्सव हर वर्ष 28 फरवरी हम इस रूप में मनाते हैं। 28 फरवरी, 1928 सर सी.वी. रमन ने अपनी खोज ‘रमन इफ़ेक्ट’ की घोषणा की थी। यही तो खोज थी, जिसमें उनको नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ और इसलिए देश 28 फरवरी को National Science Day के रूप में मनाता है। जिज्ञासा विज्ञान की जननी है। हर मन में वैज्ञानिक सोच हो, विज्ञान के प्रति आकर्षण हो और हर पीढ़ी को innovation पर बल देना होता है और विज्ञान और टेक्नोलॉजी के बिना innovation संभव नहीं होते हैं। आज National Science Day पर देश में innovation पर बल मिले। ज्ञान, विज्ञान, टेक्नोलॉजी ये सारी बातें हमारी विकास यात्रा के सहज हिस्से बनने चाहिए और इस बार National Science Day का theme है ‘Make in India Science and Technology Driven innovations’. सर सी.वी. रमन को मैं नमन करता हूँ और आप सबको विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए आग्रह कर रहा हूँ।

दोस्तो, कभी-कभी सफलताएँ बहुत देर से मिलती हैं और सफलता जब मिलती है, तब दुनिया को देखने का नज़रिया भी बदल जाता है। आप exam में शायद बहुत busy रहे होंगे, तो शायद हो सकता है, बहुत सी ख़बरे आपके मन में register न हुई हों। लेकिन मैं देशवासियो को भी इस बात को दोहराना चाहता हूँ। आपने पिछले दिनों में सुना होगा कि विज्ञान के विश्व में एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण ख़ोज हुई है। विश्व के वैज्ञानिकों ने परिश्रम किया, पीढ़ियाँ आती गईं, कुछ-न-कुछ करती गईं और क़रीब-क़रीब 100 साल के बाद एक सफलता हाथ लगी। ‘Gravitational Waves’ हमारे वैज्ञानिको के पुरुषार्थ से, उसे उजागर किया गया, detect किया गया। ये विज्ञान की बहुत दूरगामी सफलता है। ये खोज न केवल पिछली सदी के हमारे महान वैज्ञानिक आइन्स्टाइन की theory को प्रमाणित करती है, बल्कि Physics के लिए महान discovery मानी जाती है। ये पूरी मानव-जाति को पूरे विश्व के काम आने वाली बात है, लेकिन एक भारतीय के नाते हम सब को इस बात की खुशी है कि सारी खोज की प्रक्रिया में हमारे देश के सपूत, हमारे देश के होनहार वैज्ञानिक भी उससे जुड़े हुये थे। उनका भी योगदान है। मैं उन सभी वैज्ञानिकों को आज ह्रदय से बधाई देना चाहता हूँ, अभिनन्दन करना चाहता हूँ। भविष्य में भी इस ख़ोज को आगे बढ़ाने में हमारे वैज्ञानिक प्रयासरत रहेंगे। अन्तर्राष्ट्रीय प्रयासों में भारत भी हिस्सेदार बनेगा और मेरे देशवासियो, पिछले दिनों में एक महत्वपूर्ण निर्णय किया है। इसी खोज में और अधिक सफ़लता पाने के लिए Laser Interferometer Gravitational-Wave Observatory, short में उसको कहते हैं ‘LIGO’, भारत में खोलने का सरकार ने निर्णय लिया है। दुनिया में दो स्थान पर इस प्रकार की व्यवस्था है, भारत तीसरा है। भारत के जुड़ने से इस प्रक्रिया को और नई ताक़त मिलेगी, और नई गति मिलेगी। भारत ज़रूर अपने मर्यादित संसाधनों के बीच भी मानव कल्याण की इस महत्तम वैज्ञानिक ख़ोज की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनेगा। मैं फिर एक बार सभी वैज्ञानिकों को बधाई देता हूँ, शुभकामनायें देता हूँ।

मेरे प्यारे देशवासियो, मैं एक नंबर लिखवाता हूँ आपको, कल से आप missed call करके इस नंबर से मेरी ‘मन की बात’ सुन सकते हैं, आपकी अपनी मातृभाषा में भी सुन सकते हैं। missed call करने के लिए नंबर है – 81908-81908. मैं दोबारा कहता हूँ 81908-81908.

दोस्तो, आपकी exam शुरू हो रही है। मुझे भी कल exam देनी है। सवा-सौ करोड़ देशवासी मेरी examination लेने वाले हैं। पता है न, अरे भई, कल बजट है! 29 फरवरी, ये Leap Year होता है। लेकिन हाँ, आपने देखा होगा, मुझे सुनते ही लगा होगा, मैं कितना स्वस्थ हूँ, कितना आत्मविश्वास से भरा हुआ हूँ। बस, कल मेरी exam हो जाये, परसों आपकी शुरू हो जाये। और हम सब सफल हों, तो देश भी सफल होगा।

तो दोस्तो, आपको भी बहुत-बहुत शुभकामनायें, ढेर सारी शुभकामनायें। सफलता-विफलता के तनाव से मुक्त हो करके, मुक्त मन से आगे बढ़िये, डटे रहिये। धन्यवाद!

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